बिजली और गरज क्यों होती हैं?
यह एक सरल, सांत्वनापूर्ण स्वर में चित्रयुक्त ज्ञानकथा है, प्री-स्कूल बच्चों के लिए, जो बताती है कि बिजली और गरज कैसे बनती हैं। मिया सवाल पूछती है, और उल्लू प्रोफेसर दोस्ताना वैज्ञानिक भाषा में बादल, स्थैतिक बिजली, बिजली की चमक और गरज समझाते हैं और एक सरल सुरक्षा सुझाव देते हैं।
मिया ऊपर उठकर धुंधले आकाश की ओर देखती है. वह पूछती है: गरज और बिजली कैसे बनते हैं?
उल्लू प्रोफेसर मुस्कुराते हुए अपनी किताब खोलते हैं. वह कहते हैं: बादलों के अंदर बिजली बनती है.
बादलों में छोटे-छोटे पानी की बूँदें और बर्फ के क्रिस्टल होते हैं. जब ये हिलते और टकराते हैं तो छोटे कणों पर सकारात्मक या नकारात्मक आवेश आ जाता है.
जब बादल के ऊपर और नीचे अलग-अलग चार्ज हो जाते हैं, तो एक बहुत बड़ी चिंगारी कूद सकती है. वह चिंगारी ही बिजली की चमक होती है; यह बहुत चमकदार और बहुत तेज़ होती है.
गरज तब होती है जब बिजली तेज़ी से हवा को गरम कर देती है और हवा आवाज़ निकालती है. हवा अचानक फैलती है और एक बड़ा गड़गड़ाहट पैदा करती है.
हम पहले बिजली की चमक देखते हैं और फिर गरज सुनते हैं, क्योंकि रोशनी की गति आवाज़ से तेज़़ है. आप चमक और गरज के बीच के सेकंडों को गिनकर यह अनुमान लगा सकते हैं कि तूफ़ान कितना दूर है.
अगर आप गरज सुनें, तो अंदर चले जाएँ और खिड़कियों से दूर रहें. किसी बड़े से मदद लें — घर के अंदर रहना सुरक्षित रहता है.
मिया मुस्कराती है और अब अधिक निश्चिंत महसूस करती है. वह कहती है, “अब मुझे पता है कि गरज और बिजली कैसे बनते हैं !”
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मिया ऊपर उठकर धुंधले आकाश की ओर देखती है. वह पूछती है: गरज और बिजली कैसे बनते हैं?
उल्लू प्रोफेसर मुस्कुराते हुए अपनी किताब खोलते हैं. वह कहते हैं: बादलों के अंदर बिजली बनती है.
बादलों में छोटे-छोटे पानी की बूँदें और बर्फ के क्रिस्टल होते हैं. जब ये हिलते और टकराते हैं तो छोटे कणों पर सकारात्मक या नकारात्मक आवेश आ जाता है.
जब बादल के ऊपर और नीचे अलग-अलग चार्ज हो जाते हैं, तो एक बहुत बड़ी चिंगारी कूद सकती है. वह चिंगारी ही बिजली की चमक होती है; यह बहुत चमकदार और बहुत तेज़ होती है.
गरज तब होती है जब बिजली तेज़ी से हवा को गरम कर देती है और हवा आवाज़ निकालती है. हवा अचानक फैलती है और एक बड़ा गड़गड़ाहट पैदा करती है.
हम पहले बिजली की चमक देखते हैं और फिर गरज सुनते हैं, क्योंकि रोशनी की गति आवाज़ से तेज़़ है. आप चमक और गरज के बीच के सेकंडों को गिनकर यह अनुमान लगा सकते हैं कि तूफ़ान कितना दूर है.
अगर आप गरज सुनें, तो अंदर चले जाएँ और खिड़कियों से दूर रहें. किसी बड़े से मदद लें — घर के अंदर रहना सुरक्षित रहता है.
मिया मुस्कराती है और अब अधिक निश्चिंत महसूस करती है. वह कहती है, “अब मुझे पता है कि गरज और बिजली कैसे बनते हैं !”



