तीन छोटे सूअर
यह एक कोमल परी कथा है जो तीन छोटे सूअरों के अपने-अपने घर बनाने की कहानी बताती है। चालाक सूअर ने धैर्य और मेहनत के माध्यम से सभी को एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया: एकता और लगन से सुरक्षा और खुशहाली मिलती है। यह कहानी 3–6 वर्ष के बच्चों के लिए उपयुक्त है, और अंत सुकूनदेह व दिल को गर्म करने वाला है।
बहुत समय पहले, तीन छोटे सूअर थे। उन्होंने अपने-अपने घर बनाने का फैसला किया।
पहले सूअर ने भूसे से एक घर बनाया। वह काम करते हुए गा रहा था।
दूसरे सूअर ने लकड़ी की डंडियों से घर बनाया। वह बहुत तेज़ी से काम कर रहा था और चेहरे पर मुस्कान थी।
तीसरे सूअर ने ईंटों से एक मज़बूत घर बनाया। वह धैर्यपूर्वक और सावधानी से काम कर रहा था।
एक दिन, एक बड़ा बुरा भेड़िया आया। उसने सोचा कि वह सारे घर उड़ा देगा।
भेड़िया भूसे के घर पर बार-बार फूँक मारता रहा। भूसे का घर ढह गया।
डरे हुआ पहला सूअर लकड़ी के घर में भागा। उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और साँस रोक ली।
भेड़िया लकड़ी के घर पर फूँकता रहा। लकड़ी का घर भी ढह गया।
दो सूअर जल्दी से ईंटों के घर की ओर भागे। तीसरे सूअर ने उन्हें अंदर ले लिया।
भेड़िये ने अपनी सारी ताकत लगाकर ईंटों के घर पर फूँका। ईंटों का घर बिल्कुल भी हिला नहीं।
भेड़िया छत पर चढ़कर चिमनी से नीचे आने की कोशिश करने लगा। चालाक सूअर ने नीचे एक बड़े बर्तन में गरम सूप तैयार रख दिया।
भेड़िया भाग गया और फिर कभी उन्हें परेशान करने नहीं आया। तीनों सूअर कूदते हुए एक-दूसरे को गले मिले।
उसके बाद से वे साथ मिलकर घर बनाते، एक-दूसरे की मदद करते और सुरक्षित व खुशहाल जीवन बिताते रहे। वे खुशी-खुशी रहने लगे।
पूरी कहानी पढ़ें
बहुत समय पहले, तीन छोटे सूअर थे। उन्होंने अपने-अपने घर बनाने का फैसला किया।
पहले सूअर ने भूसे से एक घर बनाया। वह काम करते हुए गा रहा था।
दूसरे सूअर ने लकड़ी की डंडियों से घर बनाया। वह बहुत तेज़ी से काम कर रहा था और चेहरे पर मुस्कान थी।
तीसरे सूअर ने ईंटों से एक मज़बूत घर बनाया। वह धैर्यपूर्वक और सावधानी से काम कर रहा था।
एक दिन, एक बड़ा बुरा भेड़िया आया। उसने सोचा कि वह सारे घर उड़ा देगा।
भेड़िया भूसे के घर पर बार-बार फूँक मारता रहा। भूसे का घर ढह गया।
डरे हुआ पहला सूअर लकड़ी के घर में भागा। उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और साँस रोक ली।
भेड़िया लकड़ी के घर पर फूँकता रहा। लकड़ी का घर भी ढह गया।
दो सूअर जल्दी से ईंटों के घर की ओर भागे। तीसरे सूअर ने उन्हें अंदर ले लिया।
भेड़िये ने अपनी सारी ताकत लगाकर ईंटों के घर पर फूँका। ईंटों का घर बिल्कुल भी हिला नहीं।
भेड़िया छत पर चढ़कर चिमनी से नीचे आने की कोशिश करने लगा। चालाक सूअर ने नीचे एक बड़े बर्तन में गरम सूप तैयार रख दिया।
भेड़िया भाग गया और फिर कभी उन्हें परेशान करने नहीं आया। तीनों सूअर कूदते हुए एक-दूसरे को गले मिले।
उसके बाद से वे साथ मिलकर घर बनाते، एक-दूसरे की मदद करते और सुरक्षित व खुशहाल जीवन बिताते रहे। वे खुशी-खुशी रहने लगे।



