बहादुर छोटा दर्जी
एक दयालु और चतुर दर्जी टॉम, अपनी सूझबूझ और कोमल साहस से समस्याएँ हल करता है, एक दैत्य से दोस्ती करता है, लोमड़ी को चतुराई से मात देता है और गाँव की मदद करता है। यह प्री-स्कूल बच्चों के लिए एक संक्षिप्त परीकथा है जो साहस, दया और बुद्धिमत्ता सिखाती है।
एक समय की बात है। एक छोटा दर्जी था, जिसका नाम टॉम था।
टॉम चमकीले कपड़े सिलना पसंद करता था। वह कद में छोटा था, पर दिल से बहुत बहादुर था।
एक दिन, टॉम रोटी के टुकड़ों के निशान का पीछा करते हुए जंगल में गया। उसने एक बड़े पेड़ के पास दैत्य का जूता पाया।
दैत्य जाग गया और गुस्से में टॉम की ओर भागा। टॉम एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया और अपनी सुई से धीरे से दैत्य के पैर को खुजलाया।
दैत्य जोर-जोर से हँसा और सो गया। टॉम चुपके से दैत्य की जूते की फीते बाँध दी, और धीरे से कहा: “ नरम रहो ”।
खबर फैल गई कि एक छोटे दर्जी ने दैत्य की मदद की। दयालु राजा ने यह सुनकर टॉम को राजमहल बुलाया।
महल में, एक चालाक लोमड़ी रानी की रिबन चुरा ले गई। टॉम ने धागे और रिबन से एक चालाक जाल बनाया, और लोमड़ी ने रिबन वापस कर दी।
राजा ने टॉम का धन्यवाद किया और उसे एक खूबसूरत कुर्सी और एक सोने का थिम्बल दिया। टॉम ने थिम्बल को तख्ते पर रखा और बहुत गर्व महसूस किया।
लोग उसे 'बहादुर छोटा दर्जी' कहना शुरू कर दिए। टॉम रोज सिलाई करता रहा। उसने समझा कि बहादुर दिल न केवल दयालु हो सकता है बल्कि चतुर भी।
रात में, बच्चे आग के चारों ओर बैठकर टॉम की कहानी सुनाते हैं। वे मुस्कुराते हुए याद करते हैं कि छोटा इंसान भी बड़े और दयालु काम कर सकता है।
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एक समय की बात है। एक छोटा दर्जी था, जिसका नाम टॉम था।
टॉम चमकीले कपड़े सिलना पसंद करता था। वह कद में छोटा था, पर दिल से बहुत बहादुर था।
एक दिन, टॉम रोटी के टुकड़ों के निशान का पीछा करते हुए जंगल में गया। उसने एक बड़े पेड़ के पास दैत्य का जूता पाया।
दैत्य जाग गया और गुस्से में टॉम की ओर भागा। टॉम एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया और अपनी सुई से धीरे से दैत्य के पैर को खुजलाया।
दैत्य जोर-जोर से हँसा और सो गया। टॉम चुपके से दैत्य की जूते की फीते बाँध दी, और धीरे से कहा: “ नरम रहो ”।
खबर फैल गई कि एक छोटे दर्जी ने दैत्य की मदद की। दयालु राजा ने यह सुनकर टॉम को राजमहल बुलाया।
महल में, एक चालाक लोमड़ी रानी की रिबन चुरा ले गई। टॉम ने धागे और रिबन से एक चालाक जाल बनाया, और लोमड़ी ने रिबन वापस कर दी।
राजा ने टॉम का धन्यवाद किया और उसे एक खूबसूरत कुर्सी और एक सोने का थिम्बल दिया। टॉम ने थिम्बल को तख्ते पर रखा और बहुत गर्व महसूस किया।
लोग उसे 'बहादुर छोटा दर्जी' कहना शुरू कर दिए। टॉम रोज सिलाई करता रहा। उसने समझा कि बहादुर दिल न केवल दयालु हो सकता है बल्कि चतुर भी।
रात में, बच्चे आग के चारों ओर बैठकर टॉम की कहानी सुनाते हैं। वे मुस्कुराते हुए याद करते हैं कि छोटा इंसान भी बड़े और दयालु काम कर सकता है।



